नईदिल्ली (08 जुलाई 25)। बुधवार को पूरे देश में एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन देखने को मिल सकता है। जहां एक ओर 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनें देशव्यापी हड़ताल पर जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार में विपक्षी महागठबंधन ने चक्का जाम का आह्वान किया है। करीब 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और ग्रामीण मजदूरों के सड़कों पर उतरने की संभावना है। हड़ताल और विरोध प्रदर्शन का असर बैंकिंग, बीमा, डाक सेवाएं, कोयला खनन, परिवहन, निर्माण और फैक्ट्री सेक्टर तक पड़ेगा, जिससे करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
इस देशव्यापी हड़ताल का आयोजन 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों और उनके सहयोगी संगठनों ने किया है। इन यूनियनों में शामिल हैं: कर्मचारियों के भारत बंद में यूनियनों में एआईटीयूसी, एचएमएस, सीआईटीयू, आईएनटीयूसी, आईएनयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी शामिल हैं। हालांकि, आरएसएस समर्थित भारतीय मजदूर संघ इस आंदोलन से दूर है। संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक संगठनों के एक साझा मंच ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है, जिससे इसका असर शहरी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में भी व्यापक हो सकता है।