Monday, 05 Oct 2026

कुलदीप सेंगर: SC ने HC के जमानत आदेश पर लगाई रोक

नईदिल्ली (30 दिसंबर 25)। उन्नाव रेप केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली जमानत और सजा निलंबन के खिलाफ CBI की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के संकेत दिए हैं।

CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यह 'बेहद भयावह मामला' है, जिसमें पीड़िता की उम्र घटना के समय मात्र 15 वर्ष थी। उन्होंने बताया कि ट्रायल के दौरान IPC की धारा 376 और POCSO एक्ट की धारा 5/6 के तहत आरोप तय हुए थे और सेंगर को दोनों मामलों में दोषी ठहराया गया है। SG ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने स्पष्ट निष्कर्ष दिया था कि पीड़िता 16 साल से कम उम्र की थी और इसी आधार पर सजा सुनाई गई।

SG ने कोर्ट को बताया कि सजा के समय ट्रायल कोर्ट ने IPC की धारा 376(2)(i) के तहत दोषसिद्धि की थी, जो अपराध की तारीख पर कानून में मौजूद थी। यह बलात्कार का गंभीर (एग्रेवेटेड) रूप है, जिसमें न्यूनतम 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है, यहां तक कि जैविक जीवन तक। उन्होंने जोर देकर कहा, 'हम 15 साल की उस बच्ची के प्रति जवाबदेह हैं।'SG ने यह भी बताया कि सेंगर पीड़िता के पिता की हत्या समेत अन्य मामलों में भी दोषी है और फिलहाल जेल में है। 

इस पर CJI सूर्या कांत ने सवाल किया कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में IPC के तहत हुई दोषसिद्धि पर स्पष्ट रूप से विचार क्यों नहीं किया और ऐसा प्रतीत होता है कि फैसला केवल POCSO के आधार पर किया गया। CJI ने कहा कि यह एक गंभीर कानूनी मुद्दा है, जिस पर विचार आवश्यक है। जस्टिस जे.के. महेश्वरी ने भी टिप्पणी की कि हाईकोर्ट ने IPC की धारा 376(2)(i) पर विचार नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने सजा निलंबन का एक आधार यह माना कि सेंगर लोक सेवक नहीं है।

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