वाशिंगटन (14 सितंबर 26)। अमेरिका में 9/11 हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर CIA की ओर से जारी गोपनीय दस्तावेजों ने आतंकी संगठन अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन की खतरनाक साजिशों की एक और परत खोल दी है। सामने आए 1998 के एक खुफिया मेमो के मुताबिक, 9/11 से करीब तीन साल पहले ही लादेन का आतंकी नेटवर्क भारत समेत कई देशों में हमले करने की क्षमता और इरादे को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसी की नजर में था। यानी अमेरिका पर 9/11 का हमला होने से पहले ही लादेन का आतंकी साया भारत तक पहुंच चुका था।
CIA की ओर से जारी 70 से अधिक दस्तावेजों में 28 अगस्त 1998 का एक खुफिया मेमो भी शामिल है। इसका शीर्षक था- ‘बिन लादेन का आतंकवादी नेटवर्क अभी भी एक खतरा है।’ इस रिपोर्ट में लादेन के नेटवर्क से जुड़े संभावित खतरों और विभिन्न देशों में हमले की आशंकाओं का आकलन किया गया था। मेमो में भारत के अलावा पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन, युगांडा और नाइजीरिया जैसे देशों का भी नाम सामने आता है। इससे पता चलता है कि लादेन का आतंकी नेटवर्क केवल अमेरिका या पश्चिमी देशों तक सीमित खतरे के रूप में नहीं देखा जा रहा था। हालांकि, भारत के मामले में दस्तावेज किसी विशेष शहर, ठिकाने या व्यक्ति को निशाना बनाने की बात नहीं करता। इसमें किसी हमले की निश्चित तारीख या विस्तृत योजना का भी उल्लेख नहीं है। रिपोर्ट में दी गई जानकारी का स्रोत भी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए इसे भारत पर हमले की पक्की साजिश के बजाय उस समय अमेरिकी खुफिया एजेंसी द्वारा आंके गए संभावित खतरे के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।
दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि 2001 में हुए 9/11 हमलों से काफी पहले लादेन और उसका नेटवर्क पश्चिमी देशों के खिलाफ बड़े हमलों की तैयारी में जुटा हुआ था। एक खुफिया आकलन में चेतावनी दी गई थी कि लादेन अफगानिस्तान में मौजूद अपने नेटवर्क और सहयोगी संगठनों के जरिए दुनिया के कम से कम 60 देशों में हमले करने की क्षमता रखता था। रिपोर्ट में अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ संभावित नए हमलों को लेकर भी चिंता जताई गई थी। CIA के जारी दस्तावेज 1998 से 2001 के बीच के हैं। इनमें यह भी सामने आता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और बाद में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के प्रशासन को अल-कायदा और लादेन से पैदा हो रहे खतरे को लेकर कई बार चेतावनी दी थी। इन रिपोर्टों से साफ होता है कि 9/11 से पहले ही अमेरिकी खुफिया तंत्र लादेन के नेटवर्क को गंभीर आतंकी खतरे के रूप में देख रहा था। हालांकि, बाद में 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए हमलों ने इस खतरे की भयावहता को पूरी दुनिया के सामने ला दिया।