गिलगित (09 जून 25)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र इस समय भीषण जनआंदोलन और आंतरिक उथल-पुथल का गवाह बन चुका है। यहां आम जनता, शिक्षक और व्यापारी सभी वर्ग पाकिस्तान की दमनकारी सरकार और नीतियों के अलावा पाकिस्तान की सेना-समर्थित सरकार द्वारा पारित विवादित भूमि और खनिज अधिनियम के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर आए हैं। यह कानून स्थानीय लोगों की पारंपरिक ज़मीनों, पहाड़ों, ग्लेशियरों और खनिज संसाधनों को सरकारी संपत्ति घोषित करता है और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए भूमि हस्तांतरण का रास्ता खोलता है।
स्थानीय निवासियों ने इस कानून को ‘अपनी पहचान और अधिकारों पर हमला’ करार दिया है और पाकिस्तान के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। सड़कों और प्रमुख हाईवे जाम कर दिए गए हैं, और प्रदर्शन में महिलाएं, छात्र और राजनीतिक कार्यकर्ता बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान में पिछले एक सप्ताह से सैकड़ों स्कूली शिक्षक अपने अधिकारों और वेतन संबंधी मांगों को लेकर दिन-रात सड़कों पर धरने पर बैठे हुए हैं। पाकिस्तान सरकार की बेरुखी और लगातार अनदेखी के कारण शिक्षकों का गुस्सा अब उबाल पर है। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय व्यापारी समुदाय ने कराकोरम हाईवे को पूरी तरह बंद कर दिया है। यह हाईवे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की मुख्य जीवनरेखा मानी जाती है, और इसे रोककर व्यापारियों ने पाकिस्तान को सीधा आर्थिक झटका दिया है।