नर्मदा (16 नवंबर 25)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि स्वाधीनता संग्राम में देश के विभिन्न अचंलों में जनजातीय वीरों और जननायकों ने आजादी के लिए अपना लहू बहाया और अंग्रेजों को चैन से बैठने नहीं दिया। स्वाधीनता संग्राम के प्रारंभिक काल में जनजातीय जननायकों ने जो योगदान दिया, उसे हम भुला नहीं सकते। इतिहासकारों और तत्कालीन सरकारों ने इनके योगदान को सिरे से नकार दिया। देश के स्वाधीनता संग्राम में जनजातियों का योगदान अतुलनीय है, अभूतपूर्व है। हमने यह बीड़ा उठाया है कि जनजातीय वीरों और जननायकों के बारे में आज की नई पीढ़ी को भी अवगत कराया जाए। हर साल 15 नवम्बर को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का जन्मदिवस है। इस विशेष दिन को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने के पीछे हमारी यही मंशा है कि जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, हम सब उनके बारे में जानें, समझें, विचार करें और इन शूरवीरों के योगदान को नमन् करें।
प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को गुजरात के नर्मदा जिले से राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस समारोह का देशव्यापी सीधा प्रसारण किया गया। जबलपुर में आयोजित राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के वर्चुअल संबोधन को सभी ने सुना और देश के सभी जनजातीय वीरों को नमन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जनजातियों द्वारा बोली जाने वाली सभी बोलियों पर अध्ययन होगा। उनकी जीवनशैलियों से सीखा जाएगा। इसमें विज्ञान छिपा है। उन्होंने कहा कि यह दिवस हमें करोड़ों जनजातियों के साथ हुए अन्याय को याद करने का अवसर देता था। हम जनजातीय वर्ग को विकास की धारा से जोड़ेंगे और उन्हें मुख्य धारा में लाएंगे। जब अटलजी सरकार बनी तब देश में पहली बार जनजातीय कल्याण मंत्रालय बना था। आदिवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी हर क्षेत्र में आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देशभर में विगत पांच सालों से भगवान बिरसा मुंडा की जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन के कानूनों, कर-वसूली और जंगल पर कब्ज़े के खिलाफ जनजातीय समाज ने अपने तरीके से स्वराज का ध्वज उठाया और मध्यप्रदेश लंबे समय तक अंग्रेजों के लिए सबसे कठिन क्षेत्र बन गया था।