बीजिंग (02 जनवरी 26)। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुधवार को नए साल 2026 के मौके पर राष्ट्र के नाम संबोधन में कई अहम और विवादास्पद बयान दिए। सबसे बड़ा बयान ताइवान को लेकर रहा, जिसमें उन्होंने साफ शब्दों में ललकारते हुए कहा कि ताइवान का चीन में पुनःएकीकरण कोई भी नहीं रोक सकता। शी जिनपिंग ने कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर रहने वाले लोग खून और भाईचारे के अटूट रिश्ते से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, 'मातृभूमि का पुनर्मिलन समय की मांग है और यह प्रक्रिया रोकी नहीं जा सकती।'
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब चीनी सेना ताइवान के आसपास बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास कर रही है।चीन ताइवान के पास लड़ाकू विमानों, विमानवाहक पोतों और ड्रोन के साथ व्यापक सैन्य अभ्यास कर रहा है। 2022 के बाद यह छठी बार है जब चीन ने ताइवान के नजदीक अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने तिब्बत के निचले इलाकों में यारलुंग जांग्बो (ब्रह्मपुत्र) नदी पर बनाए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि करीब 170 अरब डॉलर की लागत से इस परियोजना का निर्माण शुरू हो चुका है। यह बांध अरुणाचल प्रदेश की सीमा के बेहद करीब और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में बन रहा है, जिससे भारत और बांग्लादेश में अचानक बाढ़ या जल संकट की आशंका गहराती जा रही है।