वाशिंगटन (23 जून 25)। ईरान पर अमेरिका के परमाणु हमले से ठीक चार दिन पहले एक मुलाकात ने खलबली मचा दी है। 18 जून को पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने वाशिंगटन डीसी में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। यह सिर्फ औपचारिक लंच नहीं था। इस मुलाकात में ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर गंभीर चर्चा होने की आशंका जताई जा रही है। और महज चार दिन बाद अमेरिका ने ईरान के तीन बड़े परमाणु ठिकानों को बंकर बस्टर बमों से निशाना बना दिया। क्या यह मुलाकात इस हमले की पूर्व-तैयारी का हिस्सा थी?
18 जून को वॉशिंगटन में ट्रंप और पाकिस्तानी आर्मी चीफ मुनीर के बीच मुलाकात हुई। इसके बाद 22 जून को अमेरिकी सेना ने ईरान पर सबसे बड़ा हमला किया। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान ने अमेरिका को सैन्य सहयोग दिया?पाकिस्तान और ईरान के बीच लगभग 900 किलोमीटर लंबी सीमा है। ऐसे में अमेरिका के लिए पाकिस्तान का सहयोग रणनीतिक रूप से बेहद अहम हो सकता है खासकर अगर अमेरिकी विमानों को ओवरफ्लाइट, एयरबेस, या लॉजिस्टिक सपोर्ट की आवश्यकता हो। पेंटागन के पूर्व सलाहकार माइकल रुबिन ने दावा किया कि यह वही रणनीति है जो 2003 में इराक युद्ध के समय अपनाई गई थी। उस वक्त अमेरिकी विमान ईरानी एयरपोर्ट्स पर लैंड करने की सहमति से ऑपरेशन चलाया गया था। रुबिन के अनुसार, पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंध भी उसी 'जरूरत के वक्त इस्तेमाल' वाले ढांचे पर चलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पाकिस्तान को तब महत्व देता है जब उसे सामरिक जरूरत हो, वरना उसे किनारे कर देता है।