ताइपे (15 जून 26)। ताइवान ने चीन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि बीजिंग आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नाम पर ताइवान को अपने में मिलाने की दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा है। ताइवान ने चीन का ‘एकीकरण’ मॉडल ठुकराते हुए कहा-यह दोस्ती नहीं, कब्जे की तैयारी है क्योंकि चीन की यह नीति 'वास्तविक एकीकरण नहीं, बल्कि वास्तविक दबाव' की रणनीति है। यह बयान तब सामने आया जब चीन की शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था के अध्यक्ष Wang Huning ने श्यामेन में आयोजित वार्षिक स्ट्रेट्स फोरम के दौरान ताइवान की विपक्षी पार्टी के नेताओं से मुलाकात की।
बैठक के दौरान वांग हुनिंग ने चीन की पुरानी नीति दोहराते हुए 'वन चाइना' सिद्धांत और तथाकथित '1992 कंसेंसस' को दोनों पक्षों के संबंधों का आधार बताया।हालांकि ताइवान की Mainland Affairs Council ने इस रुख की आलोचना करते हुए कहा कि चीन लगातार संवाद के लिए राजनीतिक शर्तें थोपता रहा है और ताइवान को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक व्यवस्था के रूप में स्वीकार करने से इनकार करता है। एमएसी का कहना है कि ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों किनारों के बीच सार्थक संवाद में सबसे बड़ी बाधा यही है कि चीन ताइवान की मौजूदा लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्वशासन की वास्तविकता को स्वीकार नहीं करता। परिषद ने कहा कि जब तक बीजिंग इस मूलभूत वास्तविकता को नहीं मानेगा, तब तक स्थायी समाधान और विश्वास बहाली मुश्किल रहेगी। ताइवान ने आरोप लगाया कि Xi Jinping द्वारा प्रस्तुत क्रॉस-स्ट्रेट संबंधों का ढांचा वैचारिक एकता, आर्थिक समावेशन, सांस्कृतिक मेलजोल और अंततः राष्ट्रीय पुनर्एकीकरण पर आधारित है। एमएसी के अनुसार, यह मॉडल वास्तव में ताइवान के स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व के लिए कोई स्थान नहीं छोड़ता।