Tuesday, 06 Oct 2026

दिग्विजय के करीबी के घर पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया

अशोकनगर (06 फरवरी 26)। मध्यप्रदेश की राजनीति में बुधवार को एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने सियासी हलकों में चर्चा तेज कर दी। केंद्रीय मंत्री और गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया अचानक कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाने वाले पूर्व विधायक गोपाल सिंह चौहान के घर पहुंच गए। मौका था पूर्व विधायक की दिवंगत माता को श्रद्धांजलि अर्पित करने का।

अपने संसदीय क्षेत्र अशोकनगर के दौरे पर पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया दिनभर कार्यक्रमों में व्यस्त रहे, लेकिन शाम होते-होते वह चंदेरी विधानसभा से पूर्व कांग्रेस विधायक गोपाल सिंह चौहान के निवास पहुंच गए। यहां उन्होंने दिवंगत माता को श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं। जैसे ही सिंधिया के कांग्रेस नेता के घर पहुंचने की खबर फैली, वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। केंद्रीय मंत्री के आगमन पर स्वयं गोपाल सिंह चौहान घर के बाहर उन्हें लेने पहुंचे और पारंपरिक सम्मान स्वरूप पैर छूकर स्वागत किया। यह दृश्य राजनीति से ऊपर मानवीय रिश्तों और मर्यादा का प्रतीक बन गया। 

गौरतलब है कि गोपाल सिंह चौहान को दिग्विजय सिंह का बेहद करीबी माना जाता है। जब ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में थे, तब दोनों नेताओं ने लंबे समय तक साथ काम किया। हालांकि सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद गोपाल सिंह चौहान उनके मुखर आलोचक भी रहे। इसके बावजूद मां के निधन की सूचना मिलते ही सिंधिया का श्रद्धांजलि देने पहुंचना राजनीतिक शिष्टाचार की बड़ी मिसाल माना जा रहा है। मुलाकात के दौरान माहौल भावुक होने के साथ-साथ हल्का-फुल्का भी रहा। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पुराने दिन याद करते हुए कहा कि पहले चुनाव में गोपाल सिंह चौहान बहुत झिझकते थे। 

इस पर गोपाल सिंह चौहान भावुक होकर बोले- 'मुझे भाषण देना महाराज ने ही सिखाया। मुझे तो बोलना भी नहीं आता था, महाराज कहते थे- बोलो… बोलो… और ऐसे सिखाया। इस पर सिंधिया हंसते हुए बोले- अब तो बहुत बोलने लगे हो, मुझे ही कहना पड़ता है- रुको, रुको।

बातचीत के अंत में गोपाल सिंह चौहान ने हाथ जोड़कर कहा..गलती हुई हो तो क्षमा करना महाराज। यह संवाद राजनीति में कटुता के बीच आपसी सम्मान और पुराने रिश्तों की गहराई को दर्शाता नजर आया। बीजेपी के बड़े नेता और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह के करीबी के बीच हुई यह मुलाकात अब सियासी गलियारों में कई मायनों में देखी जा रही है। इसे कोई राजनीतिक सौहार्द बता रहा है, तो कोई इसे आने वाले समय के सियासी संकेतों से जोड़कर देख रहा है।

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