Thursday, 01 Oct 2026

देश में इंदौर, भोपाल बनेंगे वेटलैंण्ड सिटी, अधिमान्यता का भेजा प्रस्ताव

भोपाल (14 अगस्त 24)। देश में भोपाल एवं इंदौर पहले दो शहर है, जिन्होंने वेटलैण्ड सिटी के रूप में अधिमान्यता के लिए प्रस्ताव दिया है। यह जानकारी आज यहां राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण की चौथी बैठक में दी गई। पर्यावरण एवं वन मंत्री रामनिवास रावत ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए नदी, तालाबों के किनारों पर पौधे लगाने और नदी-तालाब को शहर के सीवेज से प्रदूषित होने से रोकने के निर्देश दिए। रावत ने कहा कि मध्यप्रदेश नदी तालाबों से एक संपन्न राज्य है। सरकार और समाज को मिलकर तालाबों का संरक्षण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य शासन तालाबों के समुचित संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। जल स्रोतों का बचाना राज्य शासन की उच्च प्राथमिकता है। बैठक में पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा ने प्राधिकरण के कार्यों एवं कार्ययोजना के महत्वपूर्ण बिन्दुओं की जानकारी दी। सदस्य सचिव संजीव सिंह ने एजेण्डा के बिन्दुओं पर चर्चा की। रावत ने राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण के प्रतीक चिन्ह का लोकार्पण किया । 

सिरपुर वेटलैंड- इंदौर स्थित सिरपुर वेटलैंड एक मानव निर्मित वेटलैंड है, जिसे पिछली दो शताब्दियों में प्राकृतिक विशेषताओं के साथ विकसित किया गया है। आमतौर पर पक्षी विहार (पक्षी अभ्यारण्य) नाम से प्रसिद्ध यह स्थल एक उथली, क्षारीय, पोषक तत्वों से भरपूर झील है। यह लुप्तप्राय प्रजातियों सहित पौधों और जानवरों को संरक्षण देती है। यह लगभग 175 स्थलीय पौधों की प्रजातियों, छह मैक्रोफाइट्स, 30 प्राकृतिक और मछली प्रजातियों, आठ सरीसृपों और उभयचरों के जीवन के लिए जरुरी व अनुकूलनीय पर्यावरण उपलब्ध कराती है। सर्दियों के मौसम में जलीयपक्षी यहाँ आते हैं। करीब 130 पक्षी प्रजातियों को यहाँ देखा गया है। इनमें कॉमन पोचार्ड (अयथ्या फेरिना), मिस्र का गिद्ध (नियोफ्रॉन पर्कनोप्टेरस) और इंडियन रिवर टर्न (स्टर्ना ऑरेंटिया) शामिल हैं। सिरपुर वेटलैंड आसपास रहने वाले समुदायों को मत्स्य पालन और औषधीय पौधों की गतिविधियों से जोड़ता है। बाढ़ को रोकता है। स्थानीय लोग शांति, मनोरंजन और पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा के लिए यहाँ आते हैँ।

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