इस्लामाबाद (29 अक्टूबर 25)। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीजफायर और आतंकवाद रोकने को लेकर चल रही वार्ता तीसरे दौर में विफल हो गई है। तुर्की में हुई इस बैठक के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर वार्ता टूटने का आरोप लगाया। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर आरोप लगाया है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकियों द्वारा पाकिस्तान पर हमले करने के लिए किया जा रहा है। तीन पाकिस्तानी अधिकारियों ने एपी को बताया कि वार्ता इसलिए रुकी क्योंकि काबुल ने पाकिस्तान की 'तार्किक और वैध मांगों' को ठुकरा दिया। पाकिस्तान चाहता था कि अफगानिस्तान यह लिखित आश्वासन दे कि उसकी धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी हमलों में नहीं होगा।
वार्ता टूटने के तुरंत बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया। आसिफ ने कहा था कि 'अगर बातचीत नाकाम रही, तो पाकिस्तान के पास खुले युद्ध के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।' यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दुनिया पहले से ही कई मोर्चों पर युद्ध की स्थिति झेल रही है और गाजा, यूक्रेन और अब दक्षिण एशिया में भी तनाव का नया खतरा मंडरा रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा पर हाल के दिनों में कई हिंसक झड़पें हुई हैं। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने अफगान सीमा के भीतर आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए और 'दर्जनों आतंकियों और सैनिकों को मार गिराया।' वहीं, तालिबान सरकार ने इन हमलों को अफगान संप्रभुता का उल्लंघन बताया और कहा कि इसमें 12 नागरिक मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए।रविवार को भी दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प में 5 पाकिस्तानी सैनिक और 25 अफगान लड़ाके मारे गए। दोनों देशों के प्रतिनिधि अभी भी तुर्की में मौजूद हैं, लेकिन चौथे दौर की बातचीत की कोई तारीख तय नहीं हुई है। पहला दौर 18-19 अक्टूबर को दोहा (कतर) में हुआ था, जहां कतर और तुर्की मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।