बांग्लादेश (01 फरवरी 26)। बांग्लादेश में 12 फरवरी को राष्ट्रीय चुनाव के मद्देनज़र अंतरिम सरकार के ताज़ा फैसलों ने राजनीतिक और सार्वजनिक हलकों में तीव्र चर्चा छेड़ दी है। राष्ट्रपति नियुक्त मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली सरकार को उम्मीद थी कि वह सिर्फ़ चुनाव की तैयारी और रोज़मर्रा के प्रशासन तक सीमित रहेगी, लेकिन इसके विपरीत हालिया निर्णयों से व्यापक विवाद पैदा हुआ है।सबसे पहले, सरकार ने सिविल सेवकों के लिए 9वीं वेतन आयोग (National Pay Commission-2025) का गठन किया है, जो सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह और भत्तों में बड़े स्तर पर बढ़ोतरी की सिफ़ारिश कर रहा है। आलोचक कहते हैं कि इससे अगले चुनी हुई सरकार पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा और देश की कमजोर अर्थव्यवस्था पर और दबाव आएगा।
वेतन वृद्धि की आवश्यकता को कुछ समूह मानते हैं, लेकिन यह सवाल उठाते हैं कि क्या अब ऐसा कदम उठाने का समय सही है। सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्तियों को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसे कुछ लोग चुनावी लाभ के लिए कदम बता रहे हैं। वहीं, शिक्षाकर्मियों और उनके प्रतिनिधि संगठनों ने वेतन विसंगतियों और दर्जेरी वृद्धि जैसे मुद्दों पर लंबे समय से आंदोलन किया है, जिसमें वेतनमान को 10वीं ग्रेड तक बढ़ाने की माँग शामिल है। एक और बड़ा निर्णय है मंत्रियों और वरिष्ठ नौकरशाहों के लिए ढाका के मंत्री इलाक़े में 72 बड़े फ़्लैटों का निर्माण, जिनका क्षेत्रफल सामान्य नागरिकों के घरों से कई गुना अधिक होगा। आलोचकों ने इसे 'व्यर्थ और विलासी' खर्च बताया है, विशेषकर ऐसे समय में जब लाखों लोग रोज़ एक उचित भोजन जुटाने में संघर्ष कर रहे हैं। सरकार ने चट्टोग्राम बंदरगाह से जुड़े समझौते, मिरसाराई आर्थिक ज़ोन में एक हथियार उत्पादन क्षेत्र की घोषणा, और Rapid Action Battalion के लिए 163 वाहन खरीदने का निर्णय भी लिया है, जिन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये निर्णय चुनावी अधिकार और देश के दीर्घकालिक हित में हैं या नहीं। विरोधियों का कथन है कि यह 'अंतरिम सरकार' के अधिकार क्षेत्र से बाहर लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले निर्णय हैं और इनसे अगले निर्वाचित प्रशासन को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।