ढाका (01 जनवरी 26)। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला शरियतपुर जिले से सामने आया है, जहां 50 वर्षीय हिंदू दवा विक्रेता खोकन दास पर भीड़ ने बेरहमी से हमला किया। आरोप है कि हमलावरों ने पहले उन पर धारदार हथियारों से वार किया, फिर जमकर पिटाई की और बाद में शरीर पर पेट्रोल डालकर उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की। यह घटना 31 दिसंबर की बताई जा रही है, जब खोकन दास अपने घर लौट रहे थे। हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और फिलहाल उनका इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, हालांकि अब तक हमलावरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह जिले के भालुका इलाके में हिंदू गारमेंट वर्कर दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। उन्हें पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई। बाद की जांच में ईशनिंदा के आरोप निराधार पाए गए और कुछ लोगों की गिरफ्तारी हुई।इतना ही नहीं, 28 दिसंबर के आसपास पिरोजपुर जिले के दुमरितला गांव और चट्टोग्राम के रावजान क्षेत्र में भी हिंदू परिवारों के घरों को निशाना बनाकर आगजनी की कोशिश की गई। कई परिवारों को घरों के अंदर बंद कर जलाने का प्रयास किया गया, हालांकि वे किसी तरह जान बचाने में सफल रहे। गौरतलब है कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में हिंदुओं सहित अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है। इन घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने गहरी चिंता और नाराज़गी जताई है। पिछले सप्ताह भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ “लगातार जारी शत्रुता” पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी और कहा था कि वह अपने पड़ोसी देश में हो रही घटनाओं पर कड़ी नजर बनाए हुए है।