नईदिल्ली (28 मार्च 25)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार की प्रवासन नीति को कठोरता और करुणा का मिश्रण करार देते हुए बृहस्पतिवार को लोकसभा में दो टूक कहा कि ‘भारत कोई धर्मशाला नहीं है कि कोई भी जब चाहे यहां आकर रह जाए।' उन्होंने सदन में ‘आप्रवास और विदेशियों विषयक विधेयक, 2025' पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि भारत में व्यापार, शिक्षा और शोध के लिए आने वालों का स्वागत होगा, लेकिन गलत उद्देश्य से और अशांति फैलाने के मंसूबे के साथ भारत में दाखिल होने वालों से कठोरता से निपटा जाएगा। शाह के जवाब के बाद सदन ने कुछ विपक्षी सांसदों के संशोधनों को खारिज करते हुए‘आप्रवास और विदेशियों विषयक विधेयक, 2025' को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।
उन्होंने कहा, ‘हमारे देश में कौन आता है और कितने समय के लिए आता है, देश की सुरक्षा के लिए हमें यह जानने का अधिकार है।' गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कई बार लोग सवाल उठाते हैं कि शरणार्थी संबंधी अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए कि पांच हजार साल से प्रवासियों के बारे में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड बेदाग रहा है और किसी शरणार्थी नीति की हमें जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत भू सांस्कृतिक देश है, भू राजनीतिक देश नहीं है...भारत का शरणार्थियों के प्रति एक इतिहास रहा है। पारसी भारत में आए। इजराइल से यहूदी भागे तो भारत में आ रहे हैं।' शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में छह पड़ोसी देशों के प्रताड़ित लोगों को भारत ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के माध्यम से शरण दी है। उन्होंने कहा, ‘घुसपैठ करने वालों को रोकेंगे, नागरिकता उन्हें ही मिलेगी जिन्होंने पड़ोसी देशों में विभाजन की विभीषीका झेली है और अत्याचारों का सामना किया है।' उन्होंने कहा कि जो कानून तोड़ेंगे उन पर सरकार की कड़ी नजर होगी। शाह ने कहा कि जहां भारत प्रवासियों का स्वागत करता है, वहीं भारत से गए प्रवासियों ने दुनिया भर में भारत की समृद्ध विरासत को पहुंचाने का काम किया है।