विशाखापत्तनम (29 नवंबर 24)। भारत ने बंगाल की खाड़ी में परमाणु ऊर्जा चालित एक पनडुब्बी से लगभग 3,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इन मिसाइलों से भारत की सामरिक क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। इस परीक्षण के साथ ही भारत उन देशों के छोटे समूह में शामिल हो गया है, जो जमीन, हवा और समुद्र से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल दागने की क्षमता रखते हैं।
सूत्रों ने बताया कि के4 मिसाइल का परीक्षण बुधवार को विशाखापत्तनम के तट पर पनडुब्बी आईएनएस अरिघाट से किया गया। उन्होंने बताया कि यह पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (एसएलबीएम) का पहला परीक्षण था। पिछले कुछ वर्षों में पनडुब्बी प्लेटफॉर्म से ठोस ईंधन वाली मिसाइल का कम से कम पांच बार परीक्षण किया गया है। सूत्रों ने बताया कि मिसाइल का लगभग पूरी रेंज के लिए परीक्षण किया गया। दूसरी अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस अरिघाट को 29 अगस्त को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया, जिसका उद्देश्य भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना है।
यह स्वदेशी प्रणालियों और उपकरणों से लैस है, जिनकी संकल्पना, डिजाइन और निर्माण एकीकरण भारतीय वैज्ञानिकों, उद्योग और नौसेनाकर्मियों द्वारा किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत अपनी समग्र सैन्य क्षमताओं को बढ़ा रहा है और अलग-अलग रेंज वाली मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है। दस दिन पहले भारत ने ओडिशा के तट से लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया। यह हथियार प्रणाली अत्यधिक गति से हमला कर सकती है और अधिकांश वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा दे सकती है।