Monday, 05 Oct 2026

भारत ने जम्मू-कश्मीर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर आर्बिट्रेशन कोर्ट के 'फैसले' को ठुकराया

नईदिल्ली (27 जून 25)। भारत ने शुक्रवार को 1960 की सिंधु जल संधि के तहत गठित मध्यस्थता न्यायालय (Court of Arbitration) को अवैध बताते हुए उसके अधिकार क्षेत्र को पूरी तरह खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर की किशनगंगा और रातले जलविद्युत परियोजनाओं से संबंधित मामलों की सुनवाई करने के इस न्यायालय के दावे को ठुकराते हुए कहा कि यह निकाय स्वयं संधि का उल्लंघन है।

विदेश मंत्रालय ने 'अवैध' मध्यस्थता न्यायालय द्वारा जारी 'पूरक पुरस्कार' को भी खारिज कर दिया, जिसमें यह निर्णय दिया गया था कि क्या इस न्यायालय को भारत की इन परियोजनाओं पर सुनवाई का कानूनी अधिकार है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह फैसला परियोजनाओं पर नहीं, बल्कि न्यायालय की वैधता पर केंद्रित था। भारत ने कहा कि वह इस तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को कभी भी कानूनन मान्यता नहीं देता और इसके गठन को सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन मानता है। मंत्रालय के अनुसार, 'इस मंच की कोई भी कार्यवाही और इससे जारी कोई भी निर्णय अवैध और निरर्थक है।'

पाकिस्तान समर्थित हालिया पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान विश्वसनीय और स्थायी रूप से सीमा पार आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता। बयान में कहा गया, 'जब तक संधि स्थगित है, भारत इसके किसी भी दायित्व का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है।' भारत सरकार ने इस पूरक निर्णय को 'पाकिस्तान के इशारे पर रचा गया नाटक' बताते हुए इसे इस्लामाबाद का एक और हताश प्रयास करार दिया, जो वैश्विक आतंकवाद में अपनी भूमिका से बचने की कोशिश है। विदेश मंत्रालय ने कहा, 'पाकिस्तान द्वारा इस मनगढ़ंत मध्यस्थता तंत्र का सहारा लेना अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसके लंबे समय से जारी धोखाधड़ी और हेरफेर की रणनीति का हिस्सा है।' यह घटनाक्रम भारत-पाकिस्तान के बीच चल रही कूटनीतिक तनातनी और बढ़ते अविश्वास को और गहराता है।

Tags:

Follow us

This question is not available..!