नईदिल्ली (03 फरवरी 26)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। सोमवार, 2 फरवरी 2026, को ममता बनर्जी 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली में मुख्य चुनाव आयोग के कार्यालय पहुंचीं और इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं।
इस प्रतिनिधिमंडल में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी, वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के साथ-साथ SIR से प्रभावित परिवारों के सदस्य भी शामिल थे। टीम में दो बूथ लेवल ऑफिसर, ऐसे लोग शामिल थे जिनके परिजनों को रिकॉर्ड में मृत बताया गया, और कुछ ऐसे नागरिक भी थे जिन्हें गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया है। चुनाव आयोग से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने काला शॉल पहनकर विरोध दर्ज कराया। बैठक के बाद बाहर निकलकर ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। ममता ने कहा कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में ऐसा रवैया पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि किसी पद की गरिमा स्थायी नहीं होती और हर पद पर बैठा व्यक्ति एक दिन जवाबदेह होता है। उनके मुताबिक, आयोग की ओर से उनके सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर पश्चिम बंगाल में लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए, वह भी बिना उचित नोटिस या सुनवाई के। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रक्रिया निष्पक्ष है, तो असम जैसे राज्यों में SIR क्यों नहीं लागू किया गया? लोकतंत्र में चुनाव नागरिकों का अधिकार है, फिर लोगों को सफाई का मौका क्यों नहीं दिया गया? ममता का दावा है कि आयोग इस चयनात्मक कार्रवाई को लेकर कोई ठोस कारण नहीं बता सका।