चंडीगढ़ (10 जुलाई 25)। आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक ऐसे बयान से राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने शासन और प्रशासन के लिए खुद को नोबेल पुरस्कार का हकदार बताया है। चंडीगढ़ में अपनी पुस्तक 'द केजरीवाल मॉडल' के पंजाबी संस्करण के विमोचन अवसर पर बोलते हुए केजरीवाल ने दावा किया कि दिल्ली में उनकी सरकार के काम में बार-बार बाधा डालने के प्रयासों के बावजूद उनके प्रशासन ने प्रभावी ढंग से काम किया है।
केजरीवाल ने अपने संबोधन के दौरान कहा, 'काम करने से रोके जाने के बावजूद, हमने अच्छा प्रदर्शन किया। उपराज्यपाल और विभिन्न कठिनाइयों के बावजूद इतना कुछ करने के लिए मुझे शासन और प्रशासन का नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए।' यह बयान तुरंत ही विवादों में घिर गया। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने केजरीवाल के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'हास्यास्पद' करार दिया। सचदेवा ने कहा, 'केजरीवाल द्वारा अपने लिए नोबेल पुरस्कार की मांग करना हास्यास्पद है। अगर अक्षमता, अराजकता और भ्रष्टाचार के लिए श्रेणियां होतीं, तो उन्हें ज़रूर यह पुरस्कार मिलता।'