महू (27 अगस्त 25)। चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भविष्य के युद्ध अब पारंपरिक नहीं, बल्कि मल्टी-डोमेन होंगे, जिनमें जमीन, आसमान, समुद्र के साथ साइबर और सूचना युद्ध भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। भविष्य के युद्ध पारंपरिक सीमाओं को नहीं पहचानेंगे और ऐसे परिदृश्यों में त्वरित व निर्णायक संयुक्त प्रतिक्रिया ही जीत की कुंजी होगी। भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहा है। हम एक शांतिप्रिय राष्ट्र हैं, लेकिन गलतफहमी में न रहें, हम शांतिवादी नहीं हो सकते। शक्ति के बिना शांति एक काल्पनिक कल्पना है। मैं एक लैटिन उदाहरण कहना चाहूंगा जिसका अनुवाद है, 'यदि आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध के लिए तैयार रहें'।
जनरल अनिल चौहान मंगलवार को डॉ. आंबेडकर नगर (महू) स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित त्रि-सेवा सेमिनार रण संवाद के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सेमिनार का विषय युद्ध पर प्रौद्योगिकी का प्रभाव था। आज बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इस दो दिवसीय सेमिनार में शामिल होंगे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीडीएस चौहान ने आगे कहा कि हमने हमेशा शस्त्र और शास्त्र की बात एक ही सांस में की है। ये दोनों एक ही तलवार के दो सिरे हैं। हम जानते हैं कि जीत के लिए सैन्य रणनीति और योद्धाओं का संयोजन जरूरी है और इसका सबसे बड़ा और बेहतरीन उदाहरण महाभारत और गीता हैं। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि अर्जुन सबसे महान योद्धा थे, फिर भी उन्हें विजय की ओर ले जाने के लिए कृष्ण की आवश्यकता थी। इसी तरह, हमारे पास चंद्रगुप्त थे, जिन्हें चाणक्य के ज्ञान की आवश्यकता थी। भारतीय सेना भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए लगातार अपनी क्षमता और रणनीति का विस्तार कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारतीय सेना की तैयारियों का बड़ा उदाहरण है। यह अभियान अभी जारी है और इसके अनुभव आज भी भविष्य की तैयारियों में निर्णायक साबित हो रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, एकीकृत लॉजिस्टिक्स और उन्नत तकनीक (एआई, साइबर, क्वांटम) का समावेश भारत की सैन्य क्षमता को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। उन्होंने भारत के अपने सुदर्शन चक्र (आयरन डोम की तरह की रक्षा प्रणाली) को विकसित करने के महत्व पर बल दिया, जो ढाल और तलवार दोनों का काम करेगा। जनरल चौहान ने युवा व मध्य स्तर के अधिकारियों को तकनीकी बदलावों से अवगत रहने और नए विचार प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि रण संवाद का उद्देश्य ऐसा मंच तैयार करना है, जहाँ नई सोच और अनुभव-ज्ञान साथ-साथ चल सकें।