Thursday, 01 Oct 2026

वर्ष 2026 'समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश' कृषि वर्ष के रूप में मनेगा

भोपाल (06 नबंबर 25)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि का क्षेत्र गरीब वर्ग और किसानों को लाभ पहुंचाने वाला मुख्य क्षेत्र है। कृषि से संबद्ध गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वावलंबन के भी कई अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसी उद्देश्य से प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में नवाचार की पर्याप्त संभावना है। प्रदेश की विविधता से परिपूर्ण भौगोलिक स्थिति को देखते हुए खेती से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों को गति दी जाए। धान की खेती को प्राथमिकता देने के साथ गेहूं, चना, दलहन, तिलहन, हॉर्टीकल्चर आदि के क्षेत्र में भी अन्य राज्यों के साथ ही अन्य देशों में हो रहे नवाचारों से अवगत कराने के लिए कृषकों को विविध देशों का भ्रमण कराया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश शुक्रवार को वर्ष 2026 के कृषि वर्ष मनाने के संबंध में विधानसभा के समिति के कक्ष में आयोजित बैठक में दिए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 को समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की टैगलाइन के साथ कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास और रोजगार सृजन पर विशेष फोकस रहेगा। किसानों की आय दोगुनी करने से आगे बढ़कर कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक प्रेरित, रोजगार सृजन मॉडल में परिवर्तित करना कृषि वर्ष का मूल उद्देश्य है। अत: आत्मनिर्भर किसान, उन्नत कृषि और कृषकों के हित में बाजार से संबंधों के आधार पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के माध्यम से समृद्ध प्रदेश के निर्माण के विजन से गतिविधियां संचालित की जाएं। कृषि उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य एवं वानिकी सहित सभी संबद्ध क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए जिला आधारित क्लस्टर विकास के लिए गतिविधियां संचालित की जाएं। उच्च उत्पादकता, प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाओं, प्रसंस्करण एवं निर्यात उन्मुख कृषि के माध्यम से किसान की शुद्ध आय में वृद्धि के लिए प्रयास हों और ग्रामीण युवाओं के लिए नई पीढ़ी के कृषि आधारित रोजगार जैसे ड्रोन सर्विस, एफपीओ प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, हाइड्रोपोनिक्स आदि के अवसरों का सृजन किया जाए। किसानों की शुद्ध आय में तेजी और स्थायी वृद्धि करने, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध करने, किसानों के लिए उनके उत्पादों की बाजार में पहुंच सुनिश्चित करने और उनकी खाद्य प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से गतिविधियां संचालित की जाएं।

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