कराकस (04 जनवरी 26)। वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन के बाद सत्ता का संतुलन अचानक बदल गया है और इसी के साथ एक नाम तेजी से चर्चा के केंद्र में आ गया है- नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और दिग्गज विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को ‘पकड़े जाने’ और उन पर मुकदमा चलाने के अमेरिकी संकेतों के बाद वेनेजुएला में पावर वैक्युम की स्थिति बन गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर मादुरो शासन खत्म होता है, तो देश की बागडोर किसके हाथ में जाएगी?
अमेरिकी अटॉर्नी पाम बॉन्डी के इस बयान के बाद कि मादुरो पर मुकदमा चलेगा, वॉशिंगटन में भी चर्चा तेज हो गई है कि वेनेजुएला की अगली लीडरशिप कौन संभालेगा। इसी बहस के बीच मारिया कोरिना मचाडो को ट्रांजिशनल सरकार या नई राष्ट्रपति के तौर पर सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। मचाडो खुले तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला नीति का समर्थन करती रही हैं। वे प्राइवेटाइजेशन, अमेरिकी निवेश और फ्री मार्केट की पक्षधर हैं। यही वजह है कि समर्थक उन्हें 'वेनेजुएला की आयरन लेडी' भी कहने लगे हैं। 58 वर्षीय मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की सबसे प्रभावशाली विपक्षी नेता हैं। वह लंबे समय से ह्यूगो शावेज और फिर निकोलस मादुरो की सरकारों के खिलाफ लोकतंत्र और स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ती रही हैं। दिसंबर में उन्होंने दावा किया था कि मादुरो शासन के दिन गिने-चुने हैं। मचाडो का जन्म एक संपन्न परिवार में हुआ था। 2010 में वे पहली बार नेशनल असेंबली की सदस्य चुनी गईं। उसी दौर में एक ऐतिहासिक घटना घटी, जब तत्कालीन राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज से उनका राष्ट्रीय टेलीविजन पर आमना-सामना हुआ। उस बहस में मचाडो ने शावेज की नीतियों पर सीधा हमला करते हुए कहा था- 'जब्त करना, चोरी करना है।' यह बयान आज भी वेनेजुएला की राजनीति में याद किया जाता है। 2014 में मादुरो सरकार ने उन्हें देश से बाहर कर दिया। इसके बावजूद वे ‘वेंटे वेनेजुएला’ पार्टी की संस्थापक और नेता के तौर पर विपक्ष की सबसे मजबूत आवाज बनी रहीं। मचाडो मादुरो शासन को खुले तौर पर 'क्रिमिनल रेजीम' और 'नार्को-टेररिस्ट' कहती हैं।
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने मचाडो को 'शांति की एक बहादुर और समर्पित चैंपियन' बताते हुए कहा कि वह 'बढ़ते अंधेरे के बीच लोकतंत्र की लौ जलाए रखती हैं।' नोबेल पुरस्कार स्वीकार करते हुए मचाडो ने बताया कि 16 महीनों तक छिपकर रहने के दौरान विपक्ष ने देशभर में नागरिकों का एक नेटवर्क तैयार किया, जो वेनेजुएला में लोकतांत्रिक बदलाव की तैयारी कर रहा है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, 'मैं फिर से साइमन बोलिवर ब्रिज पर खड़ी होऊंगी, जहां कभी मैंने देश छोड़ने वालों को रोते हुए विदा किया था। अगली बार मैं उनका उस शानदार जीवन में स्वागत करूंगी, जो हमारा इंतजार कर रहा है।'
उन्होंने यह भी दोहराया कि वेनेजुएला वापसी को लेकर उन्हें कोई संदेह नहीं है।