Monday, 05 Oct 2026

संविधान का एक शब्द भी छुआ गया तो हम पूरी ताकत से लड़ेंगे : खरगे

नईदिल्ली (01 जुलाई 25)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को कहा कि अगर संविधान में किसी एक शब्द को भी छुआ गया तो इसके खिलाफ उनकी पार्टी पूरी ताकत से लड़ेगी। उन्होंने प्रस्तावना में ‘समाजवादी' और ‘धर्मनिरपेक्ष' शब्दों की समीक्षा करने संबंधी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सहकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के आह्वान पर यह टिप्पणी की। बेंगलुरु में अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में खरगे ने दावा किया कि होसबाले 'मनुस्मृति' को मानने वाले व्यक्ति हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'वह नहीं चाहते कि गरीब वर्ग के लोग आगे आएं। जो हजारों साल पहले होता था, वह उसी व्यवस्था को जारी रखना चाहते हैं। इसलिए उन्हें समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पसंद नहीं है।'

खरगे के मुताबिक, ये सिर्फ होसबाले का मत नहीं है, बल्कि आरएसएस का मत है। उन्होंने आरोप लगाया, 'आरएसएस हमेशा गरीब लोगों, दलितों और अनुसूचित जाति और अन्य समुदायों के खिलाफ है। यदि उन्हें इतनी ही रुचि है, तो वे अस्पृश्यता को हटा सकते थे। उनका दावा है कि वे हिंदू धर्म के चैंपियन हैं। यदि वे ऐसे हैं, तो उन्हें अस्पृश्यता को खत्म कर देना चाहिए।' राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने यह भी कहा कि आरएसएस को अपने सभी स्वयंसेवकों को यह सुनिश्चित करने के लिए तैनात करना चाहिए कि अस्पृश्यता दूर हो और देश को एकजुट रखा जाए।

खरगे ने कहा, ‘इसके बजाय, केवल बातें करना, शोर मचाना और देश में भ्रम पैदा करना, बुरी बात है और हम इसके खिलाफ हैं। अगर संविधान में किसी भी शब्द को छुआ गया तो पार्टी पूरी ताकत से लड़ेगी।' पिछले सप्ताह नयी दिल्ली में आपातकाल पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए होसबाले ने कहा था, ‘बाबासाहेब आंबेडकर ने जो संविधान बनाया, उसकी प्रस्तावना में ये शब्द कभी नहीं थे। आपातकाल के दौरान जब मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, संसद काम नहीं कर रही थी, न्यायपालिका पंगु हो गई थी, तब ये शब्द जोड़े गए।' उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर बाद में चर्चा हुई लेकिन प्रस्तावना से उन्हें हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। होसबाले ने कहा, ‘इसलिए उन्हें प्रस्तावना में रहना चाहिए या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए।' 

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