भोपाल (21 जून 25)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ:2028 में श्रद्धालुओं को विकसित और विस्तारित घाटों की ऐसी सुविधा उपलब्ध होगी जिससे 24 घंटे में पांच करोड़ श्रद्धालु पुण्य स्नान का लाभ ले सकेंगे। क्षिप्रा के दोनों ओर लगभग 30किलोमीटर की लम्बाई में विकसित घाटों पर सुविधाजनक ढंग से स्नान संभव होगा। यह सिंहस्थ ऐतिहासिक सिद्ध होगा। मध्यप्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर देश के लिए उदाहरण बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने शुक्रवार को भारत भवन में छह दिवसीय सदानीरा समागम का शुभारंभ करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि जल संचयन और जल संरक्षण की आदिकाल से परम्परा रही है। मनुष्य भोजन के बिना रह सकता है लेकिन जल के बिना अधिक दिन जीवित नहीं रह सकता। भारतीय परम्परा में जीवन के अंत में भी गंगा जल आवश्यक माना गया है। जल आक्सीजन भी प्रदान करता है। मध्यप्रदेश सरकार ने 30 मार्च से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने का अभियान संचालित किया। प्रदेश के नगर-नगर और गांव-गांव में जल स्रोतों को शुद्ध और उपयोगी बनाने का कार्य चल रहा है। अनेक पोखर, जलाशय और बावड़ियों को पुनर्जीवन भी प्राप्त हुआ है। इस अभियान में सरकार और समाज ने संयुक्त रूप से कार्य करके दिखाया है। देश में जल संरक्षण के कार्य में श्रेष्ठ परिणाम लाने वाले जिलों की सूची तैयार की गईरहेंगी।
तो भारत सरकार के मापदंडों के आधार पर मध्यप्रदेश का खण्डवा जिला प्रथम स्थान पर रहा। मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह पानी के संरक्षण के कार्य किए जा रहे हैं। सदानीरा समागम में 6 दिन तक निरंतर विविध गतिविधियाँ होंगी, जिनमें जल एकाग्र डाकयू ड्रामा, फिल्में, गायन, नदीनामा के अंतर्गत काव्यपाठ, नृत्य नाटिका आदि शामिल