उज्जैन (01 सितंबर 26)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन पवित्र नगरों में एक है। हर काल में उज्जैन की आभा, कीर्ति और प्रसिद्धि युगों-युगों तक रही है। उज्जैन पर बाबा महाकाल की विशेष कृपा है। पृथ्वी पर जन्म से लेकर मृत्यु तक सबका समय नियत है, लेकिन प्रत्येक प्राणी के लिए काल का निर्धारण बाबा महाकाल ने किया है। काल की नगरी, गौरव की नगरी उज्जैन अपने गौरव को पुन: प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है। डॉ. यादव ने उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर की पंचम सवारी के महाकालेश्वर मंदिर से राम घाट पहुंचने के पश्चात प्रसारण कक्ष से संबोधित किया।
भगवान महाकालेश्वर की पंचम सवारी सोमवार को हर्षोल्लास से नियत समय पर महाकालेश्वर मंदिर से निकाली गई। सवारी के रामघाट पर पहुंचने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पालकी में विराजित भगवान चन्द्रमौलेश्वर का विधि विधान से पूजा-अर्चना की। पुजारी पं. आशीष शर्मा ने पालकी में विराजित चंद्रमौलेश्वर का माँ शिप्रा के जल से जलाभिषेक करवाया। महाकालेश्वर की सवारी के रामघाट पर पंहुचने पर हेलीकाप्टर से पुष्प वर्षा की गई। सवारी के रामघाट पहुंचने के समय मुख्यमंत्री डॉ. यादव दत्त अखाडा साइड से नाव में सवार हो कर रामघाट पहुँचे। इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, उज्जैन उत्तर विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा, बडनगर विधायक जितेंद्र उदय सिंह पंड्या, उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी, संजय अग्रवाल सहित गणमान्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबोधन में कहा कि उज्जैन में अनेक विकास कार्य चल रहे हैं, महाकाल की कृपा से सभी वर्गों के लोगों ने अपने मकान स्वयं तोड़कर विकास में सहयोग प्रदान किया है। सभी ने स्वेच्छा से मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे तक हटाए। नागरिकों से मिला स्वैच्छिक सहयोग भारत ही नहीं दुनिया के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मध्यप्रदेश सरकार आगामी सिंहस्थ: 2028 के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए कटिबद्ध है। सभी प्रकार के विकास कार्य और जनकल्याणकारी कार्यों को गति प्रदान की जा रही है। सम्राट विक्रमादित्य की नगरी पुन: उत्कृष्ट की ओर बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल से सभी के लिए सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना कर रहे हैं। बाबा महाकाल की पंचम सवारी का सजीव प्रसारण हुआ, इससे करोड़ों श्रद्धालु साक्षी बने। अनेक राष्ट्रों से भी श्रद्धालुओं ने इस विशेष प्रसारण व्यवस्था का लाभ लिया। उज्जैन में सवारी के मार्ग में स्थित निवास करने वाले नागरिकों के साथ ही प्रदेश के स्थानों के श्रद्धालु सवारी की साक्षी बने। श्रद्धालुओं में छोटे बच्चे, युवा, महिलाएं बुजुर्ग सभी शामिल थे। उत्साह, उमंग और श्रद्धा की अभिव्यक्ति देखने को मिली।