नईदिल्ली (19 नवंबर 24)। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु की जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करने से इंकार कर दिया। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट हर मामले की विशेषज्ञ नहीं है और सरकार चलाना कोर्ट का काम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'हम हर चीज के विशेषज्ञ नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट हर चीज की दवा नहीं है। आप राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, अपनी पार्टी में जाइए और वहां इस मुद्दे को उठाइए। सरकार चलाना कोर्ट का काम नहीं है।' इस पर कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला राजनीतिक है, और इसे अदालत में नहीं लाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख साफ करता है कि वह इस मामले पर ध्यान नहीं देगा, क्योंकि यह सरकार या राजनीति से जुड़ा हुआ है।
याचिकाकर्ता पिनाक पानी मोहंती ने अदालत में दलील दी कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु को लेकर आज तक कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है। उनका कहना था कि साल 1970 में बने खोसला कमिशन ने नेताजी के लापता होने और मृत्यु के संबंध में कोई ठोस नतीजा नहीं पेश किया था। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि नेताजी की मृत्यु 1945 में विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी, और कोर्ट को उनकी मृत्यु की सही वजह का पता लगाने के लिए जांच का आदेश देना चाहिए। इसके अलावा, याचिका में यह भी मांग की गई थी कि यह घोषित किया जाए कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आज़ाद हिंद फौज ने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह मुद्दा उचित मंच पर उठाना चाहिए, और सुप्रीम कोर्ट इस तरह के राजनीतिक मामलों में दखल नहीं दे सकता।