Monday, 28 Sep 2026

2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य

नईदिल्ली (21 सितंबर 26)। केंद्र सरकार ने देश को वर्ष 2029 तक पूरी तरह से नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है और इसके लिए वर्ष 2026-29 के लिए 3 साल का समयबद्ध रोडमैप तैयार किया है। यह जानकारी शिमला में केंद्रीय गृह मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा आयोजित 'नशा मुक्त भारत अभियान 2029' मीडिया संवाद के दौरान दी गई। कार्यक्रम में पीआईबी के अतिरिक्त महानिदेशक राज कुमार और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के उत्तर क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक अमनजीत सिंह मुख्य वक्ता रहे।

यह विज़न दस्तावेज़ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 26 जून 2026 को एनसीओआरडी की 10वीं शीर्ष समिति की बैठक में जारी किया गया था। इस रोडमैप में 4 प्रमुख स्तंभ, 25 घटक और 200 से अधिक एक्शन पॉइंट्स शामिल हैं: कार्रवाई व खुफिया आधारित प्रवर्तन: यह स्तंभ नेटवर्क-केंद्रित रणनीति पर आधारित है। इसमें केवल छिटपुट जब्ती के बजाय ड्रग नेटवर्क के वित्तीय ढांचे को ध्वस्त करने, संपत्तियों को जब्त करने और फ्रीज करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके तहत विदेश से काम कर रहे 100 शीर्ष भगोड़ों को 2029 तक भारत वापस लाने का लक्ष्य रखा गया है। सिंथेटिक और रासायनिक ड्रग्स पर नकेल: सिंथेटिक ड्रग्स बनाने वाली गुप्त प्रयोगशालाओं को लक्षित किया जाएगा। प्रीकर्सर रसायनों के निर्माण से लेकर खपत तक 100 प्रतिशत डिजिटल ट्रैकिंग स्थापित की जाएगी ताकि उनका अवैध इस्तेमाल रोका जा सके। मांग में कमी और जागरूकता: जन जागरूकता अभियानों के साथ-साथ नशा मुक्ति व पुनर्वास सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। इसके तहत स्कूल और कॉलेज परिसरों के आसपास 500 मीटर के दायरे को 'सुरक्षित क्षेत्र'  घोषित करने का प्रस्ताव है। क्षमता निर्माण और अंतर-एजेंसी समन्वय: मार्च 2027 तक प्रत्येक राज्य में पूर्ण रूप से सुसज्जित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन सुनिश्चित किया जाएगा। मामलों की तेजी से जांच के लिए 30 दिनों के भीतर फॉरेंसिक रिपोर्ट उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रगति की निगरानी के लिए त्रैमासिक समीक्षाएं और स्कोरकार्ड लागू किए जाएंगे।

अभियान के तहत 'Whole of Government' और 'Whole of Society' दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें केंद्र व राज्य सरकारों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थान, युवा संगठन और समाज के सभी वर्ग शामिल होंगे। राज कुमार ने बताया कि वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के बाद अब नशीले पदार्थों की तस्करी को खत्म करना देश की सबसे बड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकता है। अभियान में युवाओं को जोड़ने के लिए एनसीसी, एनएसएस और 'माइ भारत' मंचों के माध्यम से 1 लाख 'नशा मुक्त मित्र' तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।



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