इंदौर (09 जनवरी 26)। भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल सर्वे के दौरान 50 बोरिंग का पानी दूषित पाया गया था जिसके बाद नगर निगम एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। अब सभी बोरिंग का क्लोरीनेशन कर पुन: पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट दो से तीन दिनों में प्राप्त होने की संभावना है।
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं। सैकड़ों लोग इन बोरिंग का उपयोग करते हैं और कई स्थानों पर बोरिंग से पाइपलाइन भी डाली गई है, जिससे लोगों की पेयजल आवश्यकता पूरी होती है। पूर्व में सर्वे के दौरान 50 बोरिंग का पानी दूषित पाया गया था, जिसके बाद एहतियातन इनके उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। उन्होंने बताया कि सभी दूषित बोरिंग का क्लोरीनेशन करवाकर दोबारा पानी के सैंपल लिए गए हैं। रिपोर्ट संतोषजनक आने के बाद ही लोगों को इन बोरिंग के पानी का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी।
भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 20 लोगों की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया है। क्षेत्र की ड्रेनेज और नर्मदा जल आपूर्ति लाइनों को हटाकर नई लाइनें डाली जा रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को पद से हटा दिया है। वहीं, नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है।