नईदिल्ली (08 जून 26)। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस में विद्रोह की लपटें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं क्योंकि 58 विधायकों की बगावत के बाद अब टीएमसी के संसदीय दल तक भी ये विरोध की आग पहुंच गई है। तृणमूल कांग्रेस में टूट की अटकलों पर सोमवार को पार्टी की लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने मुहर लगा दी है। सांसद काकोली घोष ने कहा है कि मेरे साथ टीएमसी के करीब 20 सांसदों ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि ये बैठक असंतुष्ट सांसदों के एक समूह ने बंद कमरे में बैठक की, जिसने पार्टी में असंतोष के स्तर को उजागर किया है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, रविवार देर रात दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर करीब 20 सांसद इस अनौपचारिक बैठक में शामिल हुए। इस घटनाक्रम ने उन अटकलों को हवा दे दी है कि हाल ही में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक दल को तोड़ने वाली यह बगावत अब पार्टी के संसदीय दल के भीतर भी आकार ले सकती है। बैठक के बारे में जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, सांसदों ने भविष्य की संभावित रणनीतियों पर चर्चा की और पार्टी की मौजूदा संसदीय नेतृत्व संरचना पर अपनी नाराजगी जताई। हालांकि, तृणमूल के वरिष्ठ सांसद सौगत राय ने बड़े पैमाने पर पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, 'मैंने सुना है कि कुछ सांसदों ने कल रात अलग बैठक की। बैठक में क्या हुआ, यह वही बता सकते हैं। उन लोगों ने मुझसे कोई संपर्क नहीं किया।' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा तृणमूल सांसदों से संपर्क किए जाने की खबरों पर राय ने कहा कि उनसे भी संपर्क किया गया था, लेकिन उन्होंने पेशकश को ठुकरा दिया। चार बार के सांसद राय (78) ने कहा, 'मैंने उनसे दो टूक कह दिया कि मैं तृणमूल के साथ रहूंगा। इस उम्र में खेमा बदलना मेरे लिए संभव नहीं।' हालांकि, बैठक में कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया गया, लेकिन इस तरह के विकल्पों पर विचार-विमर्श करना ही तृणमूल के सांसदों के एक वर्ग में गहरे असंतोष को उजागर करता है।