नईदिल्ली (11 जुलाई 24)। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी है कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की “प्रताड़ना” का शिकार हैं और आबकारी नीति से जुड़े धन शोधन मामले में निचली अदालत द्वारा उन्हें दी गई जमानत को रद्द करना “न्याय की गंभीर विफलता” के समान होगा। मामले में उनकी जमानत को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय की याचिका का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जमानत के विवेकाधीन आदेशों को केवल अभियोजन पक्ष की 'धारणाओं और कपोल कल्पना' के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।
ईडी की याचिका पर दाखिल अपने जवाब में केजरीवाल ने कहा,'विशेष न्यायाधीश द्वारा जमानत देने का आदेश न केवल तर्कसंगत था, बल्कि प्रथम दृष्टया यह भी दर्शाता है कि ‘दोनों पक्षों के प्रासंगिक तर्कों और मंशाओं' पर विचार करने, उन्हें ईमानदारी से दर्ज करने और उनसे निपटने में उचित विवेक का प्रयोग किया गया था।' उन्होंने कहा, 'इसलिए, आदेश को रद्द करना न्याय की गंभीर विफलता के समान होगा।'
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक ने उच्च न्यायालय से ईडी की याचिका खारिज करने और 25 जून के अंतरिम आदेश को रद्द करने का आग्रह किया, जिसके तहत निचली अदालत के 20 जून के फैसले पर रोक लगा दी गई थी, जिसमें उन्हें जमानत मिली थी। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा को बुधवार को याचिका पर सुनवाई करनी थी। उन्हें ईडी के वकील ने सूचित किया कि जांच एजेंसी को उसकी अर्जी पर केजरीवाल के जवाब की प्रति मंगलवार देर रात 11 बजे मिली और ईडी को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए कुछ समय की जरूरत है।