नईदिल्ली (10 फरवरी 26)। नई दिल्ली में संसद के बजट सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष की ओर से पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव के बाद एक असाधारण फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि जब तक इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, वे स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। हालांकि संसदीय नियमों में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है, लेकिन ओम बिरला ने स्वयं सदन की अध्यक्षता से दूरी बनाए रखने का निर्णय लिया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार और विपक्ष-दोनों पक्षों की ओर से उन्हें मनाने की कोशिशें हुईं, लेकिन स्पीकर अपने फैसले पर कायम हैं।
संसदीय सूत्रों का कहना है कि बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन, यानी 9 मार्च को लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा संभव है। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 50 लोकसभा सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा। इसके बाद सदन में हाथ उठाकर मतदान कराया जा सकता है और फिर अध्यक्षीय पीठ बहस की अनुमति दे सकती है। जानकारी के अनुसार, ओम बिरला ने मंगलवार को लोकसभा के सेक्रेटरी-जनरल को निर्देश दिया कि उनके खिलाफ पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव की संसदीय नियमों के तहत जांच की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। यह कदम विपक्ष की ओर से नोटिस दिए जाने के बाद उठाया गया है। कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ औपचारिक रूप से नो-कॉन्फिडेंस मोशन का नोटिस दाखिल किया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि यह नोटिस दोपहर 1:14 बजे रूल 94C के तहत प्रस्तुत किया गया। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, इस नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसे विपक्ष की एकजुटता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सदन में विपक्षी सांसदों को बार-बार बोलने से रोका जा रहा है। अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में चार प्रमुख घटनाओं का हवाला दिया गया है, जिनमें स्पीकर के फैसलों पर सवाल खड़े किए गए हैं।