नईदिल्ली (29 जुलाई 25)। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका से बातचीत में किसी भी स्तर पर व्यापार के विषय का कोई लेनादेना नहीं था और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 22 अप्रैल से 17 जून तक कोई बातचीत नहीं हुई। ऑपरेशन सिंदूर विषय पर लोकसभा में चर्चा में भाग लेते हुए जयशंकर ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस दौरान अमेरिका से बातचीत में व्यापार से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं आया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संघर्ष रुकवाने के दावों को लेकर विपक्ष के सवालों पर जयशंकर ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 22 अप्रैल से 17 जून के बीच कोई सीधा संवाद नहीं हुआ।' उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल को ट्रंप ने पहलगाम हमले के बाद मोदी से बात की थी और 17 जून को मोदी की कनाडा यात्रा के दौरान दोनों की फोन पर बात हुई थी। पहलगाम हमले के बाद भारत को विदेश से समर्थन नहीं मिलने के विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्यों में से पाकिस्तान और तीन अन्य देशों को छोड़कर सभी ने ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन किया था।
विदेश मंत्री ने सदन में कहा, ‘पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देना जरूरी था। हमारी सीमाएं लांघी गईं तो यह संदेश देना जरूरी था कि परिणाम अच्छे नहीं होंगे।' उन्होंने हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने और अटारी सीमा बंद करने जैसे कूटनीतिक निर्णयों का जिक्र करते हुए कहा कि इन शुरुआती कदमों के बाद भारत का जवाब रुका नहीं। उन्होंने कहा कि भारत ने वैश्विक विमर्श और कूटनीतिक माहौल बनाकर यह स्पष्ट संदेश दिया कि उसकी ‘‘आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने'' की नीति है और वह अपने लोगों की रक्षा करेगा।
जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) का सदस्य होने के नाते उस मंच पर इस संबंध में समर्थन पाना भारत के लिए कठिन था, लेकिन सुरक्षा परिषद के 25 अप्रैल के बयान को देखें तो इसमें कड़े से कड़े शब्दों में पहलगाम हमले की निंदा की गई। उन्होंने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से पाकिस्तान को छोड़कर केवल तीन ने ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया।' विदेश मंत्री ने कहा कि इस दौरान देश ने कोई बाहरी मध्यस्थता स्वीकार नहीं की और परमाणु ब्लैकमेलिंग के आगे नहीं झुका।