नईदिल्ली (18 फरवरी 26)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर एक बार फिर अपने स्पष्ट और बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई संगठन असहमति को सहन नहीं कर सकता, तो वह लंबे समय तक टिक नहीं सकता। उनके मुताबिक, मतभेदों का शांत लेकिन मजबूत तरीके से जवाब देना ही लोकतांत्रिक पार्टी की पहचान होती है। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर जारी एक विस्तृत वीडियो संदेश में कांग्रेस के अतीत का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी की ताकत विविध विचारों से आती रही है।
अय्यर ने जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन समयों में विचारों की भिन्नता को पूरी तरह दबाया नहीं जाता था।उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस हमेशा कई विचारधाराओं और दृष्टिकोणों को साथ लेकर चलती रही है। अय्यर ने चेतावनी दी कि असहमति को खत्म करने की कोशिश पार्टी को कमजोर कर सकती है, जैसा कि आपातकाल के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम से संकेत मिलता है। अय्यर ने 5 मई 1989 को लोकसभा में दिए गए राजीव गांधी के उस भाषण का जिक्र किया, जिसमें धर्मनिरपेक्ष भारत की अनिवार्यता पर जोर दिया गया था। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को चुनौती दी कि वे Rahul Gandhi से वही स्पष्ट रुख दोहराने को कहें। उनका कहना था कि पार्टी को अपने मूल सिद्धांतों को दोबारा मजबूती से सामने रखना चाहिए। अय्यर के अनुसार, कांग्रेस की परंपरा रही है कि बहस और मतभेद से पार्टी मजबूत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि ईमानदार असहमति और व्यक्तिगत स्वार्थ से प्रेरित असहमति में फर्क होता है।