तेहरान (05 मार्च 26)। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद भारत ने पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने गुरुवार को भारत की ओर से तेहरान स्थित ईरानी दूतावास में जाकर शोक-पुस्तक पर हस्ताक्षर किए और संवेदना व्यक्त की। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरघची से फोन पर बातचीत की। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी देते हुए क्षेत्र में शांति और तनाव कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद भारत की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था। भारत ने अभी तक संयुक्त सैन्य कार्रवाई करने वाले United States और Israel की खुलकर निंदा भी नहीं की है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत कर जल्द युद्धविराम और शांति बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया था। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, सरकारी इमारतों और शीर्ष नेताओं के आवासों पर संयुक्त हवाई हमले किए थे। इन्हीं हमलों में 86 वर्षीय खामेनेई की मौत हो गई थी। वह 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और देश की राजनीति व सैन्य रणनीति पर उनका निर्णायक प्रभाव था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर खामेनेई की मौत की घोषणा की थी। ट्रंप ने कहा था कि यह 'ईरान के लोगों और दुनिया के लिए न्याय' है। खामेनेई की मौत के बाद दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। Russia और China ने इस सैन्य कार्रवाई की निंदा की।दोनों देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। वहीं Israel ने अपनी सेना की कार्रवाई को सफल बताया।