भोपाल (13 मार्च 26)। मध्यप्रदेश में 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है। इनमें दो सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि एक सीट कांग्रेस के पास हैं। भाजपा की ओर से डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन सांसद हैं तो कांग्रेस सीट दिग्विजय सिंह के पास है। हालांकि दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा न जाने का ऐलान कर चुके हैं लेकिन कांग्रेस में इस सीट के लिए कई दावेदार सामने आ गए हैं, जिससे इस सीट पर खेला होने की संभावना बढ़ गई है।
दिग्विजय सिंह के इनकार के बाद कांग्रेस में ही इस सीट के लिए दावेदारों की फौज खड़ी हो गई है। इस सीट के लिए कई नेताओं ने दावा ठोक दिया है। जिनमें कई दिग्गज नाम हैं- सबसे पहला नाम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी आ रहा है। वहीं पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन भी इस सीट के लिए इच्छुक हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी इस सीट से राज्यसभा जाने चाहते हैं। इसके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के साथ ही प्रदीप अहिरवार भी दावेदारों की फेरहिस्त में हैं। दलित वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेजने की मांग भी उठ रही है। इस संबंध में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पत्र लिखकर मांग की है। हालांकि अगर कांग्रेस एकजुट रहती है तो इस सीट पर ज्यादा बड़ा कुछ नहीं होगा लेकिन कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ा डर क्रॉस वोटिंग का है। अगर 5 से 6 विधायक भी कहीं यहां से वहां हो गए तो समझ लीजिए कांग्रेस की ये सीट हाथ से जा सकती है। वहीं बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से विधायकों को अगले चुनाव में टिकट और अन्य ऑफर देने की चर्चा भी पार्टी के अंदर चल रही है।
दरअसल, कांग्रेस का क्रॉस वोटिंग का डर जायज भी है। साल 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में भी मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग हुई थी। विपक्ष उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को 103 के करीब वोट मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी लेकिन केवल 79 वोट ही मिले थे। कांग्रेस वोटों की संख्या से हिल गई थी और साबित हुआ था कि 2 दर्जन के करीब विधायकों ने पार्टी लाइन से परे वोटिंग की।