Tuesday, 29 Sep 2026

निजी नौकरियों में आरक्षण के फैसले पर सिद्धारमैया सरकार का यू-टर्न

बेंगलुरु (18 जुलाई 24)। कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय लोगों को आरक्षण देने के फैसले से कदम वापस खींच लिए हैं। सिद्धारमैया के इस फैसले का भारी विरोध हो रहा था, जिसके कारण कांग्रेस सरकार बुरी तरह से घिर गई थी। इतना ही नहीं, इस फैसले की जानकारी देने वाले ट्वीट को भी मुख्यमंत्री को डिलीट करना पड़ा था। प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण वाले बिल पर से कदम खींचने की जानकारी खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दी। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'निजी क्षेत्र के संगठनों, उद्योगों और उद्यमों में कन्नडिगाओं के लिए आरक्षण देने के लिए कैबिनेट द्वारा अनुमोदित विधेयक को अस्थाई रूप से रोक दिया गया है। आने वाले दिनों में इस पर फिर से विचार किया जाएगा और निर्णय लिया जाएगा।' 

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राज्य में निजी संस्थानों में कन्नड़ लोगों के लिए आरक्षण लागू करने का फैसला लिया था। सिद्धारमैया कैबिनेट ने इस संबंध में एक बिल पर मुहर लगाई थी। इस बिल में कहा गया था कि कर्नाटक की गैर प्रबंधकीय नौकरियों में 75% और प्रबंधकीय नौकरियों में 50% आरक्षण कन्नड़ भाषाई लोगों को दिया जाएगा।इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी फैक्ट्रियों और दफ्तरों में नौकरी पर रखे जाने वाले लोग अब कन्नड़ ही होने चाहिए। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी दफ्तरों और फैक्ट्रियों में काम पर रखे जाने वाले ग्रुप सी और ग्रुप डी (सामान्यतः क्लर्क और चपरासी या फैक्ट्री के कामगार) के 75% लोग कन्नड़ होने चाहिए। इसके अलावा, बिल के अनुसार इससे ऊंची नौकरियों में 50% नौकरियां कन्नड़ लोगों को मिलनी चाहिए। हालांकि इस बिल का काफी तीखा विरोध हुआ था। प्रमुख कारोबारियों के बाद IT कंपनी संगठन NASSCOM (नेशनल असोसिएशन फॉर सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेस कंपनीज) ने इस निर्णय पर अपनी चिंताएं जाहिर करते हुए कहा था कि सरकार को ये बिल वापस लेना चाहिए। NASSCOM ने एक पत्र जारी करके इस नए बिल को लेकर समस्याएं बताई थी। 

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