नईदिल्ली (27 फरवरी 26)। सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए कई अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने सबसे पहले उस निगरानी समिति के सदस्यों के भुगतान को लेकर चिंता जताई, जो अगस्त 2023 में बनाई गई थी। यह समिति पूर्व हाईकोर्ट जज गीता मित्तल की अध्यक्षता में काम कर रही है। समिति में शालिनी पी. जोशी और आशा मेनन भी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि पिछले दो सालों से ये सदस्य लगातार काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें यात्रा या अन्य खर्च का भुगतान नहीं मिला है, जो चिंता की बात है।
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने इस पर नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार को अंतरिम राहत देने का आदेश दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जस्टिस गीता मित्तल को 12 लाख रुपये और अन्य दो सदस्यों को 10-10 लाख रुपये दिए जाएं। यह राशि फिलहाल अंतरिम मदद के तौर पर है। इसके अलावा, जांच की निगरानी कर रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी दत्तात्रय पडसलगीकर को भी 10 लाख रुपये देने का आदेश दिया गया है। अदालत ने Central Bureau of Investigation (सीबीआई) और मणिपुर SIT से कहा है कि 2023 हिंसा मामलों में दाखिल चार्जशीट की कॉपी पीड़ितों और उनके परिवारों को दी जाए। कोर्ट का कहना है कि पीड़ितों को केस की प्रगति की जानकारी मिलनी चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने 20 मामलों में स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है, जबकि 6 मामलों की जांच अभी जारी है और अगले छह महीनों में पूरी होने की संभावना है। कोर्ट ने बाकी मामलों की जांच भी तय समय में खत्म करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा अदालत ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को आदेश दिया है कि गुवाहाटी में चल रहे ट्रायल के लिए लीगल एड वकीलों के आने-जाने और रहने का खर्च उठाया जाए। हर मामले में पीड़ित परिवार के एक सदस्य को यह सुविधा दी जाएगी। पीड़ितों को सुरक्षा के मद्देनजर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बयान देने की अनुमति पहले की तरह जारी रहेगी। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि वह चार्जशीट के तथ्यों पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है। पीड़ित अपनी शिकायतें स्पेशल कोर्ट में रख सकते हैं।