मुंबई (20 फरवरी 26)। मुंबई की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। वृहन्न मुंबई म्युन्सिपल कॉर्पोरेशन में अनुमोदित पार्षदों के चयन को लेकर ठाकरे परिवार के भीतर नए सिरे से तनाव की चर्चा शुरू हो गई है। बुधवार को राज ठाकरे ने उपमुख्यमंत्रीएकनाथ शिंदे से उनके नंदनवन निवास पर मुलाकात की। इसके कुछ ही समय बाद उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी शिवसेना (यूबीटी) की ओर से तीन अनुमोदित पार्षदों के नामों को अंतिम रूप दे दिया। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को असहज स्थिति में ला दिया है, क्योंकि पार्टी को उम्मीद थी कि इन तीन पदों में से कम से कम एक उसे मिलेगा।
2026 के मुंबई महानगरपालिका चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस ने मराठी अस्मिता के मुद्दे पर साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। हालांकि, गठबंधन को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और भाजपा ने निगम की सत्ता पर कब्जा कर लिया। उद्धव गुट विपक्ष में प्रमुख ताकत के रूप में उभरा, जबकि अलग-अलग नगर निकायों में दोनों दलों के रुख ने आपसी समीकरणों को और जटिल बना दिया। बीएमसी में कुछ पार्षद विशेषज्ञता या विशेष श्रेणी के तहत नामांकित किए जाते हैं। शिवसेना (यूबीटी) के हिस्से में आए तीन पदों को लेकर एमएनएस ने साझेदारी की मांग की थी। एमएनएस नेता यशवंत किल्लेदार ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि गठबंधन की भावना के तहत एक सीट उनकी पार्टी को मिलनी चाहिए। इसके बावजूद उद्धव ठाकरे ने साईनाथ दुर्गे, माधुरी मांजरेकर और कैलाश पाठक के नामों पर मुहर लगा दी। आधिकारिक घोषणा 28 फरवरी को होने की संभावना है।
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राऊत ने प्रेस वार्ता में एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिंदे ने बालासाहेब ठाकरे की विरासत से विश्वासघात किया है। राज ठाकरे और शिंदे की मुलाकात पर पूछे जाने पर राउत ने कहा कि किसी से मिलना व्यक्तिगत निर्णय है और उनकी पार्टी इस पर टिप्पणी नहीं करेगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच संबंध पहले भी उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में अटकलों को हवा दे दी है कि क्या दोनों के बीच दरार गहरी हो सकती है। मुंबई की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में नए समीकरण बना सकता है।