नईदिल्ली (10 जुलाई 24)। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को व्यवस्था दी कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) केंद्र सरकार के नियंत्रण में काम करती है। न्यायालय का यह निर्णय तब आया जब उसने पश्चिम बंगाल में सहमति वापस लिए जाने के बाद भी सीबीआई के तफ्तीश करने का विरोध करते हुए राज्य द्वारा दायर मुकदमे की विचारणीयता पर केंद्र की आपत्ति को खारिज कर दिया। पश्चिम बंगाल सरकार ने सीबीआई को 16 नवंबर, 2018 को राज्य में मामलों की जांच करने या छापे मारने के लिए दी गई अनुमति को वापस ले लिया था।
शीर्ष अदालत ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन (डीएसपीई) अधिनियम, 1946 के अनेक प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा, ‘हम यह भी पाते हैं कि स्थापना, शक्तियों का प्रयोग, अधिकार क्षेत्र का विस्तार, डीएसपीई का नियंत्रण, सब कुछ भारत सरकार के पास है।' न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने व्यवस्था दी थी कि मुकदमा विचारणीय है। पीठ ने कहा, ‘हमारे विचार से सीबीआई एक शाखा या अंग है जिसकी स्थापना डीएसपीई कानून द्वारा लागू वैधानिक योजना के मद्देनजर भारत सरकार द्वारा की गई और वह भारत सरकार के अधीन है।' इसमें कहा गया है कि पूरी योजना के अवलोकन से पता चलेगा कि विशेष पुलिस बल, जिसे डीएसपीई कहा जाता है, के गठन से लेकर उन अपराधों या अपराधों की श्रेणियों को निर्दिष्ट करने वाली अधिसूचनाएं जारी करना जिनकी जांच इसके द्वारा की जानी है, डीएसपीई के अधीक्षण और प्रशासन तथा केंद्र शासित प्रदेशों से परे क्षेत्रों में डीएसपीई की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र का विस्तार, इन सबसे केंद्र सरकार महत्वपूर्ण तरीके से जुड़ी है।