नईदिल्ली (21 फरवरी 26)। पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी टकराव पर कड़ी टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि दोनों संस्थाओं के बीच अविश्वास और आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बन गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह स्थिति बेहद खेदजनक है और संवैधानिक संस्थाओं से बेहतर समन्वय की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में पाई गई तार्किक विसंगतियों से जुड़े दावों और आपत्तियों पर निर्णय लेने के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि Calcutta High Court के मुख्य न्यायाधीश ऐसे सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों (एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज स्तर) को नामित करें, जो जिलों में जाकर मामलों की सुनवाई कर सकें। इन अधिकारियों को राज्य प्रशासन द्वारा पहले से नियुक्त कर्मचारियों और माइक्रो-ऑब्जर्वर्स का सहयोग मिलेगा। अदालत ने माना कि यह असाधारण परिस्थिति है, जिससे न्यायिक कार्य पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन हाईकोर्ट आवश्यक व्यवस्थाएं कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने Election Commission of India को 28 फरवरी तक संशोधित मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सूची भी जारी की जा सकेगी। साथ ही दस्तावेजों की जांच और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा कम से कम एक सप्ताह बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।