Sunday, 04 Oct 2026

SIR: न्यायिक अधिकारियों पर शक बर्दाश्त नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नईदिल्ली (11 मार्च 26)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी पक्ष द्वारा न्यायिक अधिकारियों पर संदेह जताने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि अब तक न्यायिक अधिकारियों द्वारा करीब 7 लाख दावों का निपटारा किया जा चुका है। कुल 63 लाख मामलों में से लगभग 57 लाख अभी भी लंबित हैं। इस पर CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जैसे ही न्यायिक अधिकारियों को इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी दी गई, कुछ पक्ष पीछे हटने लगे। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी बताया कि कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से प्राप्त जानकारी के अनुसार 10 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है। CJI ने राज्य के आवेदन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह समय से पहले दायर किया गया प्रतीत होता है और इससे ऐसा लगता है कि न्यायिक अधिकारियों पर भरोसा नहीं किया जा रहा। उन्होंने सख्त लहजे में पूछा कि ऐसा आवेदन दाखिल करने की जरूरत क्यों पड़ी। अदालत ने निर्वाचन आयोग को कई अहम निर्देश दिए: SIR प्रक्रिया में ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिससे प्रक्रिया बाधित हो, जब तक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अनुमति न दें। पोर्टल में आने वाली तकनीकी समस्याओं को तुरंत ठीक किया जाए। जरूरत पड़ने पर नए लॉग-इन आईडी जारी किए जाएं ताकि अधिकारी काम जारी रख सकें। न्यायिक अधिकारी के फैसले के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कोई अपील नहीं होगी। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों की सुनवाई के लिए पूर्व हाई कोर्ट जजों का अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस ट्रिब्यूनल से जुड़ा खर्च चुनाव आयोग वहन करेगा।

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