नईदिल्ली (30 जुलाई 24)। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को बताया कि उन्हें गर्व है कि वह जाट हैं और उनकी जाति को राजस्थान के साथ ही केंद्रीय सूची में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का दर्जा मिला हुआ है। सभापति को अपनी जाति के बारे में यह सफाई राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान उस वक्त देनी पड़ी जब सत्ता पक्ष के एक सदस्य ने बजट चर्चा में हिस्सा लेते हुए धनखड़ को ओबीसी बताया और उस पर कांग्रेस की एक सदस्य ने सवाल खड़े किए।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के धनश्याम तिवाड़ी ने कांग्रेस और विपक्षी सदस्यों द्वारा जाति आधारित जनगणना की मांग उठाए जाने पर एक उदाहरण देते हुए बताना चाहा कि इस सरकार में कैसे विभिन्न जातियों को प्रमुखता दी गई है। उन्होंने कहा कि संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आईं थी तो वह सबसे आगे थीं और वह आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने कहा, ‘उनके पीछे उपराष्ट्रपति धनखड़ साहब थे जो ओबीसी हैं। और मैं ब्राहण इन सबकी आरती उतार रहा हूं।'
इसी समय कांग्रेस की रजनी पाटिल ने सवाल किया कि ‘धनखड़ साहब' कब से ओबीसी हो गए वह तो जाट हैं। इस पर सभापति ने कहा कि उन्हें कभी अपनी जाति बताने की आवश्यकता नहीं पड़ी लेकिन आज वह बता रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं जाट जाति से हूं और मुझे गर्व है। यह जाति राजस्थान में ओबीसी में है और केंद्रीय सूची में भी ओबीसी में है।' उन्होंने सवाल उठाने वाली पाटिल से कहा कि वह भी जाटों से वाकिफ हैं इसलिए अपनी रिश्तेदारी भी जाटों में की है। धनखड़ ने आगे कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जमाने में पहली बार राजस्थान के जाटों को ओबीसी सूची में डाला गया था। भाजपा के सदस्य के लक्ष्मण ने कहा कि कांग्रेस वालों को पता ही नहीं है कि कौन ओबीसी है और कौन अनुसूचित जाति है। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि इनके नेता जाति जनगणना की मांग करते हैं और उन्हें ओबीसी के बारे में कोई जानकारी नहीं है।