नईदिल्ली (03 अगस्त 24)। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को लोक अदातल के अंतिम दिन कहा कि लोग अदालतों के मामलों से ‘इतने तंग आ चुके हैं’ कि वे समझौता चाहते हैं। उन्होंने कहा कि लोक अदालतें ऐसे मंच हैं, जहां अदालतों में या मुकदमेबाजी से पहले लंबित विवादों और मामलों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा या समझौता किया जाता है। पारस्परिक रूप से स्वीकृत समझौते के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की जा सकती।
चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष लोक अदालत में कहा, 'लोग इतना परेशान हो जाते हैं कि कोर्ट के मामलों से वे कोई भी समझौता चाहते हैं... बस कोर्ट से दूर करा दीजिए। यह प्रक्रिया ही सजा है और यह हम सभी न्यायाधीशों के लिए चिंता का विषय है।' सीजेआई ने कहा कि उन्हें हर स्तर पर लोक अदालत की स्थापना में बार और बेंच सहित सभी से जबरदस्त समर्थन और सहयोग मिला।
चंद्रचूड़ ने कहा कि जब लोक अदालत के लिए पैनल गठित किए गए थे, तो यह सुनिश्चित किया गया था कि प्रत्येक पैनल में दो न्यायाधीश और बार के दो सदस्य होंगे। उन्होंने कहा, 'ऐसा करने के पीछे उद्देश्य अधिवक्ताओं को संस्था पर स्वामित्व देना था क्योंकि यह ऐसी संस्था नहीं है जो केवल न्यायाधीशों द्वारा चलाई जाती है, और यह न्यायाधीशों की, न्यायाधीशों के लिए, न्यायाधीशों द्वारा संस्था नहीं है।' सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, 'लोक अदालत का उद्देश्य लोगों के घरों तक न्याय पहुंचाना और यह सुनिश्चित करना है कि हम उनके जीवन में निरंतर मौजूद रहें।'