नईदिल्ली (24 फरवरी 26)। भारत में स्कूली शिक्षा को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय बड़ा कदम उठाने जा रहा है। 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 3 से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और Computational Thinking को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाएगा। उच्च कक्षाओं के लिए AI का नया और ज्यादा एडवांस सिलेबस 2027 से लागू करने की तैयारी है। यह बदलाव शिक्षा मंत्रालय की उस रणनीति का हिस्सा है, जो National Education Policy 2020 (NEP 2020) और National Curriculum Framework for School Education 2023 (NCF-SE 2023) के अनुरूप तैयार की गई है। उद्देश्य साफ है-बच्चों को AI-ड्रिवन दुनिया के लिए तैयार करना। इसका ड्राफ्ट सिलेबस Central Board of Secondary Education (CBSE) ने तैयार किया है, जिसकी समीक्षा National Council of Educational Research and Training (NCERT) द्वारा की जा रही है। AI अब हेल्थकेयर, बैंकिंग, इंडस्ट्री, मीडिया और शिक्षा जैसे हर क्षेत्र में तेजी से प्रवेश कर चुका है। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यदि बच्चों को शुरुआती कक्षाओं से ही AI की समझ दी जाए, तो वे भविष्य की नौकरियों और तकनीकी चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे। शिक्षकों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसे NISHTHA और डिजिटल लर्निंग मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं, ताकि वे नए पाठ्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। फिलहाल कक्षा 6 से 12 तक AI वैकल्पिक विषय या स्किल मॉड्यूल के रूप में उपलब्ध है। नया फ्रेमवर्क इसे अधिक संरचित, व्यापक और कई स्तरों पर अनिवार्य बनाएगा।