अखनूर (03 नवंबर 26)। उत्तर भारत के सबसे बड़े मेलों में शामिल झिड़ी मेला इसी महीने 23 नवंबर से शुरू होने जा रहा है और इसे लेकर प्रशासन पूरी तरह से तैयारियों में जुट गया है। बाबा दा तालाब अपनी प्राचीनता और धार्मिक महत्ता के लिए विशेष पहचान रखता है। लगभग 700 वर्ष पुराने इस तालाब को लेकर क्षेत्र के लोगों में गहरी आस्था और मान्यता जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि इस तालाब के पवित्र जल में स्नान करने से फोड़े-फुंसियों, खुजली और त्वचा से संबंधित विभिन्न रोगों से राहत मिलती है।
इस संबंध में मंदिर योजना के मुख्य पुजारी ने जानकारी देते हुए बताया कि बाबा दा तालाब का इतिहास लगभग 700 वर्ष पुराना है। उनकी मान्यता के अनुसार, जिन लोगों को त्वचा संबंधी परेशानियां होती हैं, वे इस तालाब में स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास लंबे समय से बना हुआ है कि तालाब के जल में स्नान करने से त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभ मिलता है। उन्होंने बताया कि यह तालाब केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और प्राचीन परंपरा का भी प्रतीक है। आज भी दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पहुंचकर तालाब के महत्व को जानने और इसकी धार्मिक परंपरा से जुड़ने आते हैं।