Thursday, 05 Nov 2026

BP की दवा छोड़ने से हार्ट अटैक-स्ट्रोक का खतरा

ऑक्सफ़ोर्ड (29 अक्टूबर 26)। हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए एक अहम स्टडी में सामने आया है कि दवा नियमित न लेने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव का फायदा काफी कम हो सकता है। 91,000 से अधिक लोगों के आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की दवा लेने वाले मरीजों में दिल से जुड़ी बड़ी घटनाओं का जोखिम 11% कम रहा, जबकि बार-बार डोज मिस करने वालों को खास फायदा नहीं मिला।

साइंसडेली वेबसाइट के मुताबिक, ब्लड प्रेशर की दवा की डोज बार-बार मिस करने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दिल से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा कम करने में इलाज की प्रभावशीलता घट सकती है। दुनिया भर में 30 से 79 साल की उम्र के लगभग 1.4 बिलियन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) है, जो बीमारी और मौत का एक बड़ा कारण है। हालांकि यह साबित हो चुका है कि ब्लड प्रेशर कम करने वाली दवाएं दिल से जुड़ी परेशानियों का खतरा कम करती हैं, फिर भी लगभग आधे मरीज़ बताए गए तरीके से अपनी दवा नहीं लेते हैं।

UK की ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रेज़ेंटर मिस कियानकियान यांग ने बताया, 'हमारे पास इस बात के सबूत हैं कि एंटीहाइपरटेंसिव दवा का ठीक से पालन न करने से नतीजे और खराब होते हैं।' साइंसडेली वेबसाइट के मुताबिक, मिस कियानकियान यांग ने कहा, 'हालांकि, पिछला डेटा ऑब्ज़र्वेशनल स्टडीज़ से आया है और दूसरे फैक्टर्स से कन्फ्यूज हो सकता है। हमने एंटीहाइपरटेंसिव ट्रीटमेंट के फायदों पर दवा लेने के असली असर का पता लगाने के लिए रैंडमाइज्ड ट्रायल डेटा का एनालिसिस किया।'

यह बेहतर ढंग से समझने के लिए कि लगातार दवा लेने से इसके फायदों पर क्या असर पड़ता है, रिसर्चर्स ने नौ क्लिनिकल ट्रायल्स में 91,339 पार्टिसिपेंट्स के हर मरीज़ के डेटा का एनालिसिस किया। हर ट्रायल में ब्लड प्रेशर ट्रीटमेंट (इंटरवेंशन ग्रुप) की तुलना एक दूसरे तरीके (तुलना करने वाला ग्रुप: या तो प्लेसीबो या कम इंटेंसिव रेजिमेन) से की गई।रिसर्चर्स ने पार्टिसिपेंट्स को इस आधार पर दो कैटेगरी में बांटा कि उन्होंने अपने बताए गए ट्रीटमेंट को कितनी बारीकी से फॉलो किया। साइंसडेली वेबसाइट के मुताबिक, जिन लोगों ने अपनी बताई गई दवा का कम से कम 80% लिया, उन्हें ज़्यादा दवा लेने वाला माना गया, जबकि जिन्होंने 80% से कम लिया, उन्हें कम दवा लेने वाले ग्रुप में रखा गया।

क्लिनिकल ट्रायल्स की रेगुलर मॉनिटरिंग और स्ट्रक्चर्ड कंडीशन के बावजूद, समय बीतने के साथ मरीज़ अपनी दवा लेने में कम रेगुलर होते गए। मिस यांग ने कहा, 'समय के साथ पालन में कमी साफ़ दिख रही थी, यहाँ तक कि ट्रायल की स्ट्रक्चर्ड सेटिंग में भी।' कुल मिलाकर, पहले साल में 88% पार्टिसिपेंट्स ने ज़्यादा पालन की लिमिट पूरी की, लेकिन पाँचवें साल तक यह आँकड़ा घटकर सिर्फ़ 79% रह गया।




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